हरियाणा विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र सोमवार को, 18000 ग्रुप डी कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
विशेष सत्र में सत्ता पक्ष विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा होने की संभावना

सत्य खबर हरियाणा
Haryana Assembly : हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने कर्मचारियों को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी पूरी कर ली है। सोमवार, 27 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसका केंद्र बिंदु प्रदेश के करीब 18 हजार ‘ग्रुप-डी’ कर्मचारियों की बहुप्रतीक्षित पदोन्नति है। कल सुबह सरकार ‘हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज बिल 2026’ पटल पर रखेगी। इस बिल का पारित होना उन हजारों युवाओं के लिए भविष्य के नए द्वार खोलेगा जो लंबे समय से क्लर्क बनने का सपना संजोए बैठे हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट ने पहले ही ग्रुप-डी कर्मचारियों के प्रमोशन कोटे को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने पर अपनी मुहर लगा दी है। इस फैसले के कानूनी रूप लेते ही विभाग में लिपिकीय पदों (Clerical Posts) पर भर्ती के दौरान अनुभवी कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि, इसके लिए एक शर्त भी रखी गई है केवल वही कर्मचारी इस कोटे के तहत पदोन्नत हो सकेंगे, जिन्होंने अपनी सेवा के 5 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं।
सत्र भले ही एक दिन का हो, लेकिन इसमें सियासी तपिश भरपूर रहने वाली है। सत्ता पक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को घेरने के लिए सदन में एक निंदा प्रस्ताव लाएगा। इस सियासी हमले की काट तैयार करने के लिए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सोमवार सुबह 9:30 बजे विधायक दल की बैठक बुलाई है। कांग्रेस इस सत्र के दौरान बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि विधानसभा सत्र में सरकार को बेनकाब करेंगे। हर मुद्दे का मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा। अगर भाजपा कांग्रेस की निंदा करेगी तो कांग्रेस भी भाजपा की निंदा करेगी। महिला आरक्षण बिल पर केंद्र सरकार की नीयत साफ नहीं है और यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है। उन्होंने कहा कि हम विधानसभा सत्र में सरकार को एक्सपोज करेंगे और हर मुद्दे पर खुलकर जवाब देंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्ष सरकार की नीतियों पर आक्रामक रुख अपनाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम हर मंच पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। महिला आरक्षण के मुद्दे पर हुड्डा ने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि जब 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका था और राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी, तो अधिसूचना जारी करने में तीन साल क्यों लगाए गए? सरकार की नीयत साफ नहीं है और यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है।
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